आशावल का इतिहास ओर अलग अलग नाम क्यों हे आशावल आशा भील आशो आशापल्ली
अलग अलग नाम क्यों हे ?
आशावल
आशा
आसो
आशापल्ली
नामों के रहस्यों को समझने का प्रयास करते हैं:
१. "आशावल" एक समृद्ध नगर (८वीं या ९वीं शताब्दी)
आशावल अहमदाबाद का सबसे प्राचीन नाम है। राजा कर्णदेव सोलंकी द्वारा 'कर्णावती' बसाए जाने से पहले यहाँ एक समृद्ध नगर अस्तित्व में था, जिसे 'आशावल' के नाम से जाना जाता था। यह साबरमती नदी के पूर्वी तट पर स्थित એક सामरिक અને व्यापारિક केंद्र था।
२. आशा (आशा भील - १०वीं शताब्दी)
आशा भील, आशावल के एक शक्तिशाली भील राजा थे। उनका नाम ही उनके वंश की उपस्थिति का प्रमाण देता है। लोकगीतों और भाट-चारण की कथाओं में आशा भील का विशेष रूप से उल्लेख मिलता है।
३. आसो (११वीं शताब्दी)
'आसो' नाम 'आशा भील' के ही वंशज का संक्षिप्त या स्थानीय (तद्भव) स्वरूप है। वे ११वीं शताब्दी में यहाँ शासन करते थे। उनके पास हाथियों और हजारों सैनिकों की एक विशाल सेना थी। पाटन के राजा कर्णदेव सोलंकी ने उनके साथ भीषण युद्ध किया था।
४. आशापल्ली (१२वीं शताब्दी)
शब्द का अर्थ: संस्कृत ग्रंथों (जैसे जैन प्रबंधों) में 'आशावल' को 'आशापल्ली' के रूप में लिखा गया है। 'आशापल्ली' का अर्थ है आशा और उनके वंशजों का निवास स्थान।
जैन धर्म का केंद्र: ऐतिहासिक साक्ष्य बताते हैं कि प्रसिद्ध जैन मुनि हेमचंद्राचार्य और अन्य आचार्यों के समय में यहाँ कई जैन बस्तियाँ थीं। ११वीं और १२वीं शताब्दी के जैन साहित्य में यह नाम बार-बार आता है।
> निष्कर्ष: ये चारों नाम एक ही आधार से जुड़े हैं। आशा (या आसो) भील नामक राजा द्वारा बसाया गया नगर 'आशावल' कहलाया, जिसे संस्कृत में 'आशापल्ली' कहा गया। बाद में इसी स्थान पर कर्णदेव सोलंकी ने 'कर्णावती' और सुल्तान अहमद शाह ने 'अहमदाबाद' की स्थापना की।
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सारांश तालिका (महत्वपूर्ण जानकारी):
| क्रमांक | नाम | पहचान | समय अवधि |
|---|---|---|---|
| १ | आशावल | भील शासित नगर का नाम | ८वीं या ९वीं शताब्दी |
| २ | आशा भील | भील राजवंश के शासक | १०वीं शताब्दी |
| ३ | आसो भील | भील राजवंश के वंशज | ११वीं शताब्दी |
| ४ | आशापल्ली | वंशजों का जैन/संस्कृत नाम | १२वीं शताब्दी (सोलंकी काल) |
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